परदेशी भाग 10

बॉबी के इतना कहते ही कमल ने उसकी फ्राक भी उतार दी। जांघिया तो उसका पहले ही उतर चुका था। इसके बाद कमल ने अपने भी सारे कपड़े उतार दिए और बॉबी को बिस्तर पर लेटा दिया। बॉबी बलिहारी होने वाली नजरों से कमल के तन चुके लौड़े को निहार रही थी। कमल आया और धीरे-धीरे उसकी चूंचियों को दबाया और फिर होंठ एक चूंची पर रख दिए। इधर उसका हाथ बॉबी की चिकनी चूत पर थिरक रहे थे, उधर वह बॉबी की चूंची को बड़े प्यार से चूस रहा था। बॉबी के सारे शरीर में सनसनी दौडऩा शुरू हो गई। कमल ने बारी-बारी बॉबी की दोनों चूचियों को चूसकर उसे काफी उत्तेजित कर दिया। इसके बाद सिर नीचे लाया और मुंह उसकी चूत पर रख दिया। बॉबी की चूत की खुशबू आज कुछ अलग ही थी। कमल जीभ निकालकर मजे से उसे चाटने लगा। इधर बॉबी का हाथ कमल के सिर पर था और वह उसके बालों को प्यार से सहला रही थी। कमल काफी देर तक बॉबी की चूत तो चाटता रहा, बीच के हिस्से को मुह में दबाकर चूसता रहा। कभी-कभी अपनी जीभ गोलकर उसकी चूत के छेद में घुसेड़ देता और बॉबी के मुंह से निकलने वाली सिसकारियों की आवाजें तेज होती जा रही थीं। आखिर कमल ने बॉबी की चूत से मुंह हटाया और उसके ऊपर लेटने लगा तो बॉबी बोली-
रुको।
क्यों क्या हुआ, आज दर्द नहीं होगा।
नहीं उसके लिए नहीं।
तो फिर क्या बात है।
कुछ नहीं पहले तुम लेटो।
ठीक है। यह कहकर कमल लेट गया।
बॉबी ने उसका लंड अपने हाथ में थाम लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। फिर उसने जीभ निकाली और लंड पर फिराने लगी। कमल की कमर अपने आप थिरकने लगी। कुछ देर तक वह जीभ से खिलवाड़ करती रही फिर उसने कमल का लंड मुंह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। कमल को इतना मजा आ रहा था कि वह जोर-जोर से अपनी कमर हिलाने लगा। कुछ देर बॉबी उसके लंड को चूसती रही और फिर कमल ने खुद ही उसके सिर को हटा दिया।
बस करो बॉबी, अब और नहीं सह पाउंगा।
क्यों क्या हुआ। बॉबी शरारत से बोली।
हुआ तो कुछ नहीं, मगर कुछ देर और यह तुम्हारे मुंह में रहता तो हो जाता, कमल ने अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा, चलो अब तुम लेट जाओ और इसे अपनी चूत में ले लो।
बॉबी बोली नहीं मैं नहीं लेटूंगी। हमेशा मैं ही क्यों नीचे लेटूं। अगर तुम्हें आता है तो ऐसे ही चूत मारकर दिखाओ। बॉबी शरारत के मूड़ में आ गई।
कमल ने कहा, अच्छा यह बात। चुनौती दे रही है।
यही समझ लो, बॉबी ने हंसते हुए कहा।
ठीक है, कमल ने कहा। ऐसा हो तो सकता है कि मैं ही नीचे लेटा रहूं, मगर मेहनत तुम्हें करना होगा। मंजूर है।
ठीक है मंजूर है। बॉबी बोली।
तो कमल ने उससे कहा कि उसकी कमर के दोनों तरफ अपने पैर करके बैठ जाए। बाबी ने ऐसा ही किया तो कमल ने अपना लंड हाथ में पकड़ा और बॉबी की थोड़ा उठने को कहा। बॉबी के घुटने उसकी कमर के दोनों तरफ थे, वह घुटनों पर ही थोड़ा उठी तो कमल ने उसकी चूत के छेद पर अपना लंड टिका दिया और बोला बस अब बैठ जाओ।
बॉबी जैसे ही बैठी, एक झटके में पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। बॉबी की चूत में अचानक दर्द की एक लहर सी उठी तो वह चिल्लाकर बोली।
मादरचोद यह क्या किया, फिर से मेरी चूत फाड़ दी। यह कहकर वह उठने लगी तो कमल ने उसकी कमर को थामकर वापस बैठा लिया।
बॉबी कुछ देर हाथ-पैर झटकती रही, मगर अचानक ही उसे चूत में राहत सी महसूस होने लगी और कमल का लंड सुरसुरी पैदा करने लगा तो उसने हाथ-पैर पटकने बंद कर दिए।
क्यों मजा आने लगा, कमल ने एक आंख मारते हुए कहा।
हां आ तो रहा है, मगर शुरुआत में तो जान ही निकाल दी थी। बोल नहीं सकते थे। एक झटके में पूरा डाल दिया।
कमल हंसते हुए बोला, मैने कहां डाला, तुम्हीं ने तो किया है। और चुनौती दो।
चुनौती की तो बहन की चूत। बॉबी गाली बकते हुए बोली। अब जल्दी बताओ करना क्या है। मुझसे रहा नहीं जा रहा है।
अब क्या करना है, बस मेरी कमर पर उछलो, मजा खुद-ब-खुद आने लगेगा।
कमल के इतना कहते ही बॉबी उसकी कमर पर कूदने लगी और कमल का लंड उसकी चूत के अंदर बाहर होने लगा। बॉबी आनंद के सागर में गोते लगा रही थी और धीरे-धीरे उसकी कूदने की स्पीड भी बढऩे लगी। इधर कमल अपने हाथ से उसकी दोनों चूंचियों को दबाकर, सहलाकर उसके मजे को और भी बढ़ा रहा था। बॉबी काफी देर कमल के लंड पर कूदती रही, कमरे में उसकी चूत से निकलने वाली फचाफच-गचागच की आवाज गूंजती रही। अचानक बॉबी का सारा शरीर ऐंठने लगा। उसे ऐसा लगा कि वह आनंद के चरम पर है, तभी कमल के लंड से वीर्य की पिचकारी छूटी और बॉबी की चूत में गिरी। बॉबी आनंद के चरम पर पहुंच चुकी थी। उसने जमकर कमल की कमर को अपनी टांगों के बीच कस लिया और निढाल होकर उसके ऊपर गिर गई। बॉबी पसीने से तरबतर हो रही थी। उसकी चूत में आनंद की लहरें उठ रही थीं, आंखें बंद करके वह उन्हें पी रही थी। काफी देर तक वह वैसे ही कमल के लंड को चूत में लिए पड़ी रही। इधर कमल का लंड सिकुड़कर उसकी चूत से अपने आप बाहर आ गया तो वह उठी और उसके लंड को देखते हुए बोली,
अरे इसे क्या हुआ।
कुछ नहीं। चुदाई के आखिरी में जब वीर्य निकलता है तो लंड इसी तरह सिकुड़ जाता है।
अरे मगर पिछली बार तो ऐसा नहीं हुआ था। बॉबी ने हैरत से कहा।
हुआ था, मगर दर्द के कारण तुम ध्यान नहीं दे पाई और जल्दबाजी मेें चली भी गई थी।
अ'छा अब यह फिर कब तनेगा।
जब तुम चाहो, अगर तुम चाहो तो यह फिर खड़ा हो जाएगा।
न बाबा न आज के लिए इतनी मेहनत काफी है। शहर आओ फिर मैं देखती हूं कि यह कितनी बार खड़ा होता है।
कमल मुस्कुरा दिया। बॉबी उठी और अपनी फ्राक पहन ली। और बोली,
अ'छा मैं चलती हूं।
ठीक है, कमल ने कहा और उठकर प्यार से बॉबी की चूत को एक बार सहला दिया।
बॉबी बोली, कमल जल्दी आना। मैं तुम्हारा इंतजार करुंगी। और इतना कहकर वह निकल गई। उसकी आंखों में आंसू थे, जो वह कमल को नहीं दिखाना चाहती थी। आंसू कमल की आंखों में भी मचल रहे थे, मगर वह उन्हें पी गया।