परदेशी भाग 4

अगले दिन बाबी करीब आधा घंटा देरी से कमल के घर पहुंची। कमल बड़ी बेसब्री से उसका इंतजार ही कर रहा था, कि तभी उसने खिड़की से बाबी को आते देखा। बाबी ने पैंट और टॉप पहन रखा था। कुछ देर बाद बाबी कमल की नजरों से ओझल हो गई फिर उसके कमरे में प्रविष्ट हुई।
कमल ने उसके आते  ही पूछा
बड़ी देर कर दी।
क्या करूं मनु को नींद ही नहीं आ रही थी। अभी भी उसे सोता छोड़कर आई हूं, जो भी करना हो जल्दी कर लो वरना वो जाग गई तो मुझे ढूंढेगी।
मैं तो वहीं करूंगा जिसमें तुम्हे मजा आता है।
मुझे तो अपनी चूत चटवाने में ही ज्यादा मजा आता है।
तो ठीक है मैं यही करूंगा।
इतना कहकर कमल ने बाबी के तमाम कपड़े उतार दिए और उसे बिस्तर पर लेटा दिया। पहले तो कुछ देर वो उसकी चूंचियां दबाता रहा। फिर उसने बाबी की चूंचियो को बारी बारी से चूसा और उसकी चूत पर हाथ फिराता रहा। तभी बाबी बोली
जल्दी से मेरी चूत चाटना शुरू करो न।
और कमल ने उसकी टांगों को थोड़ा फैलाया और उसकी चूत के होंठो पर अपना मुंह रख दिया, बाबी ने मारे आनंद के अपनी आंखे मूंद ली। उसके मुंह से आनंद भरी सिसकारी निकलने लगी। कमल ने अपनी जीभ निकाल कर बाबी की चूत के बीच वाले हिस्से पर फिराना शुरू किया तो बाबी के मुंह से निकलने वाली सिसकारियों की आवाज भी तेज हो गई। कमल ने उसकी चूत के बीच वाले भाग को अपने होंठो के बीच दबाकर चूसना शुरू किया तो बाबी आनंद से पागल हो गई। कमल ने अपनी जीभ बाबी की चूत के छेद में घुसा दी और  धीरे धीरे  जीभ से चूत के छेद को सहलाने लगा। बाबी को इतना मजा आया कि उसने कमल के सिर को जोर से अपनी जांघों के बीच दबा लिया। बॉबी को इतना मजा आ रहा था कि उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं।
आह...सी...सी... ओह कमल जोर से चाटो न।  आह... सी...सी.. मैं मर जाउंगी कमल। मेरे शरीर में कुछ हो रहा है। बॉबी बिस्तर पर मचल रही थी और कमल उसकी चूत को चाटने में जुटा हुआ था। बॉबी चरम पर पहुंचने ही वाली थी और उसका शरीर ऐंठने लगा था। उसे लग रहा था कि इससे बड़ा आनंद और कोई हो ही नहीं सकता, तभी कमल ने अपना मुंह बाबी की चूत से हटा लिया तो वो तड़पकर बोली…
हाय कमल रुक क्यों गए चाटते रहो न मेरी चूत। मुझे बहुत मजा आ रहा है।?
नहीं पहले तुम मेरा लंड अपने मुंह में लो तभी मैं तुम्हारी चूत चाटूंगा। कमल ने आंखों में शरारत भरकर कहा।
नहीं मैं तुम्हारा लंड मुंह में नहीं ले सकती, मुझे घिन आती है। बॉबी कमल की इस मांग से सकपका गई। वह नहीं चाहती थी कि कमल उसकी चूत से एक पल के लिए भी अपना मुंह हटाए।
जब मुझे तुम्हारी चूत चाटते हुए घिन नहीं आई तो फिर भला तुम्हे मेरा लंड मुंह में लेने में कैसे घिन आएगी? कमल ने कहा।
फिर भी तुम उसी से पेशाब करते हो, मैं उसे मुंह में नहीं ले सकती। बॉबी की आवाज में अब भी लरज थी।
देखों बाबी ये तो सौदा है। तुम मुझे मजा दो और मैं तुम्हे मजा देता हूं, वरना मैं तो चला सोने। अब कमल ने बॉबी के सामने सीधे-सीधे शर्त रख दी।
कमल की इस बात पर बाबी सोचने लगी।
कमल जानता था कि बॉबी मना नहीं कर सकती। उसने उसे आनंद की जो अनुभूति करवाई थी, उसके लिए बॉबी कुछ भी करने को तैयार हो जाती। यह तो केवल लंड चूसने का मामला था। खैर कुछ ही पल बॉबी ने सोचने में लगाए और अपना सिर सहमति में हिला दिया। बॉबी उसके लंड को मुंह में लेने को तैयार हो गई। तब कमल उसके सामने लेट गया। उसने कमल की पैंट के बटन खोलकर उसका लंड बाहर निकाला। कुछ देर उसे वैसे ही देखती रही। कमल ने उसकी तरफ प्रश्नवाचक नजरों से देखा। बॉबी से उसकी नजरें मिली तो एक बार फिर उसे सहमति में सिर हिलाया और उसे अपने मुंह में डाल लिया।
अब आनंद के सागर में गोते लगाने की बारी कमल की थी। बॉबी की गीली जीभ का स्पर्श अपने लंड पर पाते ही कमल के मंह से एक सिसकारी सी निकल गई। थोड़ी देर बाद बाबी को भी कमल का लंड चूसने में मजा आने लगा और वो बड़े चाव से उसका लंड चूसने लगी। कमल के मुंह से जोर-जोर से सिसकारियां निकलने लगी। कभी बाबी उसके लंड को जोर-जोर से चूसने लगती तो कभी वो लंड के ऊपर की चमड़ी हटाकर चाटने लगती। कमल को बहुत मजा आ रहा था कि तभी बाबी को शरारत सूझी और उसने कमल को लंड पर दांत गड़ा दिए। कमल ने तड़पकर उसके मुंह से अपना लंड बाहर खींच लिया।
बाबी ने पूछा, क्यों मजा नहीं आया?
मजा तो आ रहा था, लेकिन तुम्हारे दांतों ने सब किरकिरा कर दिया।
अचछा अब नहीं काटूंगी। कसम से बाबी कमल के लंड को प्यार से सहलाते हुए बोली।
ठीक है। कमल ने कहा और बाबी उसके लंड पर झुकने लगी तभी उसके मन में कोई विचार आया और वह रुक गई। कमल ने उसकी तरफ प्रश्रवाचक नजर से देखा तो वह बोली,
क्या ऐसा नहीं हो सकता कि तुम मेरी चूत चाटो और उसी समय मैं तुम्हारा लंड भी चूंसू? दोनों को एक साथ मजा आएगा।
हो क्यों नहीं सकता। कमल ने कहा फिर बाबी को लेटा कर इस पोजिशन में आ गया कि उसका लंड बाबी के मुंह के सामने था और बाबी की चूत उसके मुंह के सामने।