अगले दिन बॉबी सुबह उठी ही थी कि पोस्टमैन आ पहुंचा। उसने एक चिट्ठी बॉबी की मौसी को थमा दी। चिट्ठी बॉबी के नाम थी और उसकी मां ने भेजी थी। मौसी चिट्ठी खोलकर पढऩे लगी। उन्होंने बॉबी को आवाज लगाई, तो बॉबी सामने आ खड़ी हुई।
क्या हुआ मौसी, बॉबी ने पूछा।
तेरी मां की चिट्ठी आई है, तुझे तुरंत बुलाया है। कॉलेज में एडमिशन हो गया है, तेरा उसी के लिए कुछ औपचारिकताएं करना है।
अरे वाह बॉबी खुशी से झूम सी उठी, मजा आ गया। वह हमारे यहां का सबसे बड़ा कॉलेज है। मुझे उसमें दाखिला मिल ही गया।
बॉबी तू शाम की बस से ही रवाना हो जा। मैं तैयारी कर देती हूं।
ठीक है मौसी, इतना कहते-कहते बॉबी अचानक उदास हो गई। उसे कमल का ध्यान आ गया था।
क्या हुआ, चेहरे पर उदासी क्यों आ गई। मौसी ने लाड़ से पूछा।
कुछ नहीं मौसी, अब आपको और मनु को छोड़कर जाना पड़ेगा न, इसलिए। बॉबी बात बनाते हुए बोली।
अरे तो कौन सा दूर है। और फिर मनु का इंटर भी इस साल हो जाएगा, उसका दाखिला भी तेरे ही कॉलेज में करवा दूंगी। तब दोनों बहनें मिलकर रहना।
ओ मां तुम कितनी अच्छी हो, वहां खड़ी मनु यह कहकर मां से लिपट गई। उसे कल दोपहर बॉबी के साथ बिताए पल याद आ गए। वह सोच रही थी कैसे कटेगा एक साल और वह फिर बॉबी के साथ होगी और मजे करेगी।
मौसी बोली, तुम दोनों नहा लो, तब तक मैं खाने का इंतजाम करती हूं। यह कहकर वे अंदर चली गईं।
मनु ने बॉबी से कहा, दीदी आज दोपहर हम फिर एक साथ सोएंगे दीदी। कल बहुत मजा आया था।
नहीं मनु आज मुझे कहीं जाना है। अब जब तू वहां आएगी तब करेंगे। बॉबी कमल के बारे में सोचते हुए बोली।
बॉबी की बात सुनकर मनु का चेहरा लटक गया, तो बॉबी बोली, उदास मत हो मेरी लाड़ो। अभी तो तेरी छुट्टी चल ही रही है न। कुछ दिन बाद तू वहां आ जाना। अब खुश हो जा।
मनु हंस दी। बॉबी सोच रही थी कि आज भी कमल नहीं मिला तो वह क्या करेगी। अब उसने केवल एक बार चुदवाया था और उसमें भी पूरे समय दर्द से ही चिल्लाती रही। अब वह पूरी तरह खुलकर चुदाई करवाना चाहती थी। उसने सोच लिया, दोपहर में जैसे ही मनु सोएगी वह कमल के पास जाएगी।
दोपहर हुई मौसी अपने कमरे में सोने चली गईं और वह मनु के साथ उसके कमरे में। मनु ने उससे एक बार फिर कहा कि दीदी कल वाला खेल खेलो न। बॉबी ने मना कर दिया, नहीं आज मुझे कहीं जाना है। तू अभी सो जा। कुछ देर बाद आउंगी तब खेलेंगे। मनु को इस तरह बहला कर बॉबी निकल गई और सीधे कमल के घर जा पहुंची। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसके मन में आशंकाओं के बादल मंडरा रहे थे, कमल आज भी नहीं मिला तो वह क्या करेगी? मगर उसकी सारी आशंकाएं गलत साबित हुई। कमल अपने कमरे में ही था और कोई किताब पढ़ रहा था। बॉबी के आने की आहट सुनकर नजरें उठाईं और बॉबी से नजरें मिलते ही उसके होंठों पर शरारती मुस्कान थिरक उठी।
बॉबी बोली, मादरचोद कल कहां चले गए थे। मैं कितना परेशान हुई पता है।
क्यों परसो जब तुम नहीं आई तो मैं नहीं परेशान हुआ। कमल ने हंसते हुए कहा।
अ'छा तो बदला लिया जा रहा था। बॉबी झूठमूठ गुस्सा होने का नाटक करते हुए बोली कि मैं जा रही हूं। तुम पड़े रहो अपना लंड पकड़कर।
अ'छा बाबा लो कान पकड़ता हूं। अब ऐसा नहीं करूंगा। अब तो रुक जाओ।
अचानक बॉबी उदास हो गई। तो कमल ने पूछा क्या हुआ, बोला न अब नहीं करूंगा ऐसा।
अब ऐसा कर भी नहीं पाओगे कमल।
क्यों, कमल ने पूछा।
क्योंकि मैं आज शाम की बस से ही वापस जा रही हूं। बॉबी ने उदास स्वर में जवाब दिया, मेरा एडमिशन शहर के बड़े कॉलेज में हो गया। उसके लिए जाना पड़ेगा।
कौन से कॉलेज में हुआ तुम्हारा एडमिशन? कमल ने पूछा।
बॉबी ने कॉलेज का नाम बताया तो कमल खुशी से उछल पड़ा। उसने बॉबी को बांहों में भर लिया।
क्या हुआ मेरे जाने से इतना खुश क्यों हो रहे हो?
तुम्हें नहीं पता बॉबी मैने भी उसी कॉलेज में एडमिशन और छात्रवृत्ति के लिए आवेदन दिया है। भगवान ने चाहा तो मैं कुछ ही दिनों में तुम्हारे पास होउंगा।
अब बॉबी भी खिल उठी। वह खुशी से बोली, अरे फिर तो मजा आ जाएगा।
तब तक कमल का हाथ बॉबी की फ्राक ऊपर कर उसकी चड्ढी में पहुंच चुका था और वह धीरे-धीरे उसके चूतड़ों को सहला रहा था।
कमल पता नहीं क्यों मगर मुझे लग रहा है कि मुझे तुमसे प्यार हो गया है।
हां बॉबी मैं भी तुम्हें चाहने लगा हूं। अब ऐसा लगता है कि जिंदगी में और किसी लड़की की जरूरत ही नहीं है।
कमल आमतौर पर लड़के-लड़की में पहले प्यार होता है, फिर चूत-लंड का खेल। मगर हमारे मामले में उलटा हुआ। पहले चूत-लंड का खेल हुआ और फिर प्यार।
इधर कमल का हाथ बॉबी के जांघिए में थिरक रहा था, तभी अचानक बॉबी के जांघिए की इलास्टिक टूट गई और वह सरककर नीचे आ गिरा।
बॉबी चिल्लाई, यह तुमने क्या कर दिया। अब मैं घर कैसे जाउंगी।
क्या मतलब कैसे जाउंगी। जांघिया यहीं छोड़ जाओ। तुम्हारी निशानी के तौर पर मेरे पास रहेगा। तुम ऐसे ही चली जाओ। फ्राक तो पहन ही रखी है न।
अ'छा और अगर हवा से मेरी फ्राक उड़ी और किसी ने मेरी चूत और चूतड़ देख लिए तो।
संभलकर जाओगी तो ऐसा नहीं होगा। कमल ने मासूमियत से जवाब दिया।
अच्छा तो मैं जाऊं? बॉबी ने शरारत से पूछा।
क्यों चूत नहीं मरवाओगी क्या। कमल ने कहा।
देखो कमल मैं आई तो इसीलिए थी। उसदिन आखिरी में ही पूरा मजा आया और आज मैं खुलकर मजा लेना चाहती हूं। मगर जो भी करना है जल्दी करो, क्योंकि मनु से बहाना बनाकर आई हूं। ज्यादा देर हो जाएगी तो वह मुझे ढूंढने लगी।
क्या हुआ मौसी, बॉबी ने पूछा।
तेरी मां की चिट्ठी आई है, तुझे तुरंत बुलाया है। कॉलेज में एडमिशन हो गया है, तेरा उसी के लिए कुछ औपचारिकताएं करना है।
अरे वाह बॉबी खुशी से झूम सी उठी, मजा आ गया। वह हमारे यहां का सबसे बड़ा कॉलेज है। मुझे उसमें दाखिला मिल ही गया।
बॉबी तू शाम की बस से ही रवाना हो जा। मैं तैयारी कर देती हूं।
ठीक है मौसी, इतना कहते-कहते बॉबी अचानक उदास हो गई। उसे कमल का ध्यान आ गया था।
क्या हुआ, चेहरे पर उदासी क्यों आ गई। मौसी ने लाड़ से पूछा।
कुछ नहीं मौसी, अब आपको और मनु को छोड़कर जाना पड़ेगा न, इसलिए। बॉबी बात बनाते हुए बोली।
अरे तो कौन सा दूर है। और फिर मनु का इंटर भी इस साल हो जाएगा, उसका दाखिला भी तेरे ही कॉलेज में करवा दूंगी। तब दोनों बहनें मिलकर रहना।
ओ मां तुम कितनी अच्छी हो, वहां खड़ी मनु यह कहकर मां से लिपट गई। उसे कल दोपहर बॉबी के साथ बिताए पल याद आ गए। वह सोच रही थी कैसे कटेगा एक साल और वह फिर बॉबी के साथ होगी और मजे करेगी।
मौसी बोली, तुम दोनों नहा लो, तब तक मैं खाने का इंतजाम करती हूं। यह कहकर वे अंदर चली गईं।
मनु ने बॉबी से कहा, दीदी आज दोपहर हम फिर एक साथ सोएंगे दीदी। कल बहुत मजा आया था।
नहीं मनु आज मुझे कहीं जाना है। अब जब तू वहां आएगी तब करेंगे। बॉबी कमल के बारे में सोचते हुए बोली।
बॉबी की बात सुनकर मनु का चेहरा लटक गया, तो बॉबी बोली, उदास मत हो मेरी लाड़ो। अभी तो तेरी छुट्टी चल ही रही है न। कुछ दिन बाद तू वहां आ जाना। अब खुश हो जा।
मनु हंस दी। बॉबी सोच रही थी कि आज भी कमल नहीं मिला तो वह क्या करेगी। अब उसने केवल एक बार चुदवाया था और उसमें भी पूरे समय दर्द से ही चिल्लाती रही। अब वह पूरी तरह खुलकर चुदाई करवाना चाहती थी। उसने सोच लिया, दोपहर में जैसे ही मनु सोएगी वह कमल के पास जाएगी।
दोपहर हुई मौसी अपने कमरे में सोने चली गईं और वह मनु के साथ उसके कमरे में। मनु ने उससे एक बार फिर कहा कि दीदी कल वाला खेल खेलो न। बॉबी ने मना कर दिया, नहीं आज मुझे कहीं जाना है। तू अभी सो जा। कुछ देर बाद आउंगी तब खेलेंगे। मनु को इस तरह बहला कर बॉबी निकल गई और सीधे कमल के घर जा पहुंची। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसके मन में आशंकाओं के बादल मंडरा रहे थे, कमल आज भी नहीं मिला तो वह क्या करेगी? मगर उसकी सारी आशंकाएं गलत साबित हुई। कमल अपने कमरे में ही था और कोई किताब पढ़ रहा था। बॉबी के आने की आहट सुनकर नजरें उठाईं और बॉबी से नजरें मिलते ही उसके होंठों पर शरारती मुस्कान थिरक उठी।
बॉबी बोली, मादरचोद कल कहां चले गए थे। मैं कितना परेशान हुई पता है।
क्यों परसो जब तुम नहीं आई तो मैं नहीं परेशान हुआ। कमल ने हंसते हुए कहा।
अ'छा तो बदला लिया जा रहा था। बॉबी झूठमूठ गुस्सा होने का नाटक करते हुए बोली कि मैं जा रही हूं। तुम पड़े रहो अपना लंड पकड़कर।
अ'छा बाबा लो कान पकड़ता हूं। अब ऐसा नहीं करूंगा। अब तो रुक जाओ।
अचानक बॉबी उदास हो गई। तो कमल ने पूछा क्या हुआ, बोला न अब नहीं करूंगा ऐसा।
अब ऐसा कर भी नहीं पाओगे कमल।
क्यों, कमल ने पूछा।
क्योंकि मैं आज शाम की बस से ही वापस जा रही हूं। बॉबी ने उदास स्वर में जवाब दिया, मेरा एडमिशन शहर के बड़े कॉलेज में हो गया। उसके लिए जाना पड़ेगा।
कौन से कॉलेज में हुआ तुम्हारा एडमिशन? कमल ने पूछा।
बॉबी ने कॉलेज का नाम बताया तो कमल खुशी से उछल पड़ा। उसने बॉबी को बांहों में भर लिया।
क्या हुआ मेरे जाने से इतना खुश क्यों हो रहे हो?
तुम्हें नहीं पता बॉबी मैने भी उसी कॉलेज में एडमिशन और छात्रवृत्ति के लिए आवेदन दिया है। भगवान ने चाहा तो मैं कुछ ही दिनों में तुम्हारे पास होउंगा।
अब बॉबी भी खिल उठी। वह खुशी से बोली, अरे फिर तो मजा आ जाएगा।
तब तक कमल का हाथ बॉबी की फ्राक ऊपर कर उसकी चड्ढी में पहुंच चुका था और वह धीरे-धीरे उसके चूतड़ों को सहला रहा था।
कमल पता नहीं क्यों मगर मुझे लग रहा है कि मुझे तुमसे प्यार हो गया है।
हां बॉबी मैं भी तुम्हें चाहने लगा हूं। अब ऐसा लगता है कि जिंदगी में और किसी लड़की की जरूरत ही नहीं है।
कमल आमतौर पर लड़के-लड़की में पहले प्यार होता है, फिर चूत-लंड का खेल। मगर हमारे मामले में उलटा हुआ। पहले चूत-लंड का खेल हुआ और फिर प्यार।
इधर कमल का हाथ बॉबी के जांघिए में थिरक रहा था, तभी अचानक बॉबी के जांघिए की इलास्टिक टूट गई और वह सरककर नीचे आ गिरा।
बॉबी चिल्लाई, यह तुमने क्या कर दिया। अब मैं घर कैसे जाउंगी।
क्या मतलब कैसे जाउंगी। जांघिया यहीं छोड़ जाओ। तुम्हारी निशानी के तौर पर मेरे पास रहेगा। तुम ऐसे ही चली जाओ। फ्राक तो पहन ही रखी है न।
अ'छा और अगर हवा से मेरी फ्राक उड़ी और किसी ने मेरी चूत और चूतड़ देख लिए तो।
संभलकर जाओगी तो ऐसा नहीं होगा। कमल ने मासूमियत से जवाब दिया।
अच्छा तो मैं जाऊं? बॉबी ने शरारत से पूछा।
क्यों चूत नहीं मरवाओगी क्या। कमल ने कहा।
देखो कमल मैं आई तो इसीलिए थी। उसदिन आखिरी में ही पूरा मजा आया और आज मैं खुलकर मजा लेना चाहती हूं। मगर जो भी करना है जल्दी करो, क्योंकि मनु से बहाना बनाकर आई हूं। ज्यादा देर हो जाएगी तो वह मुझे ढूंढने लगी।