दूसरे दिन कमल बाबी का रास्ता देखता रहा लेकिन वह नहीं आई। कमल मन ही मन बड़बड़ात रहा, साली मादरचोद दे गई धोखा। शाम करीब चार बजे खिड़की से उसे बाबी आती दिखी। वह अलमस्त चाल से चली आ रही थी। उसने पचलून और शर्ट पहन रखा था तथा काफी खूबसूरत लग रही थी। थोड़ी देर बाद कमल को वह नजर आना बंद हो गई तथा कुछ ही देर में बाहर वाले कमरे से उसकी और मां की बात करने का आवाज सुनाई दी। कुछ देर बाद बाबी उसके कमरे में थी। उसे देखते ही कमल ने मुंह घुमा लिया तो बाबी बोली,
नाराज हो क्या?
नाराज नहीं होउंगा क्या? पूरे दिन तुम्हारा रास्ता देखता रहा और तुम अब आ रही हो।
क्या करुं मनु सो ही नहीं रही थी। थोड़ी देर पहले ही उसकी झपकी लगी और मैं चली आई। अब नाराज मत होओ जो भी करना हो कर लो।
अब तो कुछ नहीं किया जा सकता क्योंकि मां उठ गईं है। तुम कल आना।
बाबी कुछ देर कमल से बातें करती रही। वह अपने बारे में उसे बताने लगी कि छुट्टियां खत्म हो रही है। उसे कुछ ही दिन बाद वापस लौटना पड़ेगा। इसी साल वह शहर के कॉलेज में एडमिशन लेने वाली है।
कमल ने उसके मां-बाप के बारे में पूछा तो बॉबी बोली-
मेरे पिताजी नहीं है। कई साल पहले एक्सीडेंट में उनकी मौत हो गई थी। मां हैं। बड़ा कारोबार है। मां ही सारा कारोबार संभालती हैं। मैं इकलौती संतान हूं।
कमल ने कहा, अरे वाह तुम तो काफी पैसे वाली हो।
हां हूं तो मगर बचपन से ही प्यार के लिए तरस रही हूं। पिताजी थे तो मां पार्टी, सहेलियों में व्यस्त रहती थीं। अब कारोबार में व्यस्त रहती हैं। मेरे लिए उनके पास जरा भी समय नहीं। कमल ने कहा तो क्या हुआ, तुम्हारे तो मजे हैं। जैसे चाहो जिंदगी जियो। जो चाहे करो। किसी की रोक-टोक नहीं। कोई चिंता फिकर नहीं।
तुम नहीं जानते कमल अकेले जिंदगी गुजारना कितना मुश्किल होता है।
हां लेकिन पैसे पास हों तो सब आसान लगने लगता है, कमल ने कहा। मेरे पिताजी को ही लो दिनभर खेतों में काम करते हैं। शाम को घर आते हैं। मां पूरे दिन घर के काम में लगी रहती है। दोनों मुझे बहुत प्यार करते हैं, मगर पैसे की कमी से हर छोटी-बड़ी इच्छा मारना पड़ती है।
तुम फिर भी सुखी हो कमल। तंगहाली है तो क्या, कम से कम मां-बाप का प्यार तो है। बॉबी ने आह भरते हुए कहा।
कमल बोला, हां वो तो है और मैं संतुष्ट भी हूं अपनी जिंदगी से।
तो तुम्हारा भविष्य को लेकर क्या प्लान है।
कुछ नहीं इंटर कर लिया है और अब चाहता तो हूं आगे पढ़ाई करूं मगर इसके लिए शहर जाना होगा और घर के हालात ऐसे नहीं हैं कि पिताजी बाहर रहने का खर्च उठा सकें।
फिर क्या करोगे? बॉबी ने पूछा।
करना क्या है। तुम्हारे ही शहर के एक कॉलेज में छात्रवृत्ति के लिए आवेदन दिया है। यदि मिल गई तो पढ़ाई, नहीं तो खेती तो है ही। वही करूंगा। कमल ने जवाब दिया।
तुम्हें छात्रवृत्ति जरूर मिलेगी। आखिर तुम्हें शहर जो आना है। आखिर मेरी और मेरी चूत की जरूरत कौन पूरी करेगा। यह कहकर बॉबी खिलखिलाकर हंस पड़ी।
कमल ने कहा तुम्हें मजाक सूझ रहा है और यहां मैं चिंता में हूं कि पता नहीं क्या होगा?
कुछ नहीं होगा, सब ठीक हो जाएगा। बॉबी ने कहा।
अच्छा मैं चलती हूं। मनु उठ गई होगा। बॉबी ने कहा और चलने लगी।
कमल बोला कल आओगी न। आज की तरह धोखा तो नहीं दे जाओगी।
बॉबी अगले दिन आने का वादा करके वहां से चली गई। अगले दिन दोपहर को जब वह वहां पहुंची तो कमल नहीं मिला। उसने घर के सारे कमरे छान मारे लेकिन कमल का कहीं पता नहीें था। अंत में वह मन ही मन बड़बड़ाती हुई वहां से चली गई। वह चूत मरवाने के बारे में जाने क्या-क्या सोच कर वहां गई थी। कमल के न मिलने से उसके सारे मंसूबो पर पानी फिर गया। मौसी के घर आ कर वह मनु के कमरे में लेट गई। डबलबेड बिस्तर पर पास ही मनु सो रही थी। अचानक बाबी को एक ख्याल आया और उसने अपनी शर्ट के ऊपर के बटन खोल और मनु के हाथ से अपनी चूचिंयां दबवाने लगी। बाबी के मुंह से सिसकारिया निकल रही थी। तभी मनु की नींद खुल गई और उसने कहा,
ये क्या कर रही हो दीदी। मनु का स्वर सुनकर बाबी एक बार तो सकपका गई लेकिन दूसरे ही पल बोली,
मेरी अच्छी बहन किसी से ये बात कहना मत।
लेकिन दीदी ये तो गंदी बात है।
तुम्हे नहीं मालूम इस खेल में कितना मजा आता है। तुमने कभी किसी के साथ यह खेल खेला है? मनु ने नकारात्मक सिर हिला दिया तो बाबी बोली,
मेरे साथ खेलोगी?
मनु ने हां में सिर हिलाया। तब बाबी ने पहले तो उसके तमाम कपड़े उतार दिए। फिर अपने कपड़े भी उतार दिए।
नाराज हो क्या?
नाराज नहीं होउंगा क्या? पूरे दिन तुम्हारा रास्ता देखता रहा और तुम अब आ रही हो।
क्या करुं मनु सो ही नहीं रही थी। थोड़ी देर पहले ही उसकी झपकी लगी और मैं चली आई। अब नाराज मत होओ जो भी करना हो कर लो।
अब तो कुछ नहीं किया जा सकता क्योंकि मां उठ गईं है। तुम कल आना।
बाबी कुछ देर कमल से बातें करती रही। वह अपने बारे में उसे बताने लगी कि छुट्टियां खत्म हो रही है। उसे कुछ ही दिन बाद वापस लौटना पड़ेगा। इसी साल वह शहर के कॉलेज में एडमिशन लेने वाली है।
कमल ने उसके मां-बाप के बारे में पूछा तो बॉबी बोली-
मेरे पिताजी नहीं है। कई साल पहले एक्सीडेंट में उनकी मौत हो गई थी। मां हैं। बड़ा कारोबार है। मां ही सारा कारोबार संभालती हैं। मैं इकलौती संतान हूं।
कमल ने कहा, अरे वाह तुम तो काफी पैसे वाली हो।
हां हूं तो मगर बचपन से ही प्यार के लिए तरस रही हूं। पिताजी थे तो मां पार्टी, सहेलियों में व्यस्त रहती थीं। अब कारोबार में व्यस्त रहती हैं। मेरे लिए उनके पास जरा भी समय नहीं। कमल ने कहा तो क्या हुआ, तुम्हारे तो मजे हैं। जैसे चाहो जिंदगी जियो। जो चाहे करो। किसी की रोक-टोक नहीं। कोई चिंता फिकर नहीं।
तुम नहीं जानते कमल अकेले जिंदगी गुजारना कितना मुश्किल होता है।
हां लेकिन पैसे पास हों तो सब आसान लगने लगता है, कमल ने कहा। मेरे पिताजी को ही लो दिनभर खेतों में काम करते हैं। शाम को घर आते हैं। मां पूरे दिन घर के काम में लगी रहती है। दोनों मुझे बहुत प्यार करते हैं, मगर पैसे की कमी से हर छोटी-बड़ी इच्छा मारना पड़ती है।
तुम फिर भी सुखी हो कमल। तंगहाली है तो क्या, कम से कम मां-बाप का प्यार तो है। बॉबी ने आह भरते हुए कहा।
कमल बोला, हां वो तो है और मैं संतुष्ट भी हूं अपनी जिंदगी से।
तो तुम्हारा भविष्य को लेकर क्या प्लान है।
कुछ नहीं इंटर कर लिया है और अब चाहता तो हूं आगे पढ़ाई करूं मगर इसके लिए शहर जाना होगा और घर के हालात ऐसे नहीं हैं कि पिताजी बाहर रहने का खर्च उठा सकें।
फिर क्या करोगे? बॉबी ने पूछा।
करना क्या है। तुम्हारे ही शहर के एक कॉलेज में छात्रवृत्ति के लिए आवेदन दिया है। यदि मिल गई तो पढ़ाई, नहीं तो खेती तो है ही। वही करूंगा। कमल ने जवाब दिया।
तुम्हें छात्रवृत्ति जरूर मिलेगी। आखिर तुम्हें शहर जो आना है। आखिर मेरी और मेरी चूत की जरूरत कौन पूरी करेगा। यह कहकर बॉबी खिलखिलाकर हंस पड़ी।
कमल ने कहा तुम्हें मजाक सूझ रहा है और यहां मैं चिंता में हूं कि पता नहीं क्या होगा?
कुछ नहीं होगा, सब ठीक हो जाएगा। बॉबी ने कहा।
अच्छा मैं चलती हूं। मनु उठ गई होगा। बॉबी ने कहा और चलने लगी।
कमल बोला कल आओगी न। आज की तरह धोखा तो नहीं दे जाओगी।
बॉबी अगले दिन आने का वादा करके वहां से चली गई। अगले दिन दोपहर को जब वह वहां पहुंची तो कमल नहीं मिला। उसने घर के सारे कमरे छान मारे लेकिन कमल का कहीं पता नहीें था। अंत में वह मन ही मन बड़बड़ाती हुई वहां से चली गई। वह चूत मरवाने के बारे में जाने क्या-क्या सोच कर वहां गई थी। कमल के न मिलने से उसके सारे मंसूबो पर पानी फिर गया। मौसी के घर आ कर वह मनु के कमरे में लेट गई। डबलबेड बिस्तर पर पास ही मनु सो रही थी। अचानक बाबी को एक ख्याल आया और उसने अपनी शर्ट के ऊपर के बटन खोल और मनु के हाथ से अपनी चूचिंयां दबवाने लगी। बाबी के मुंह से सिसकारिया निकल रही थी। तभी मनु की नींद खुल गई और उसने कहा,
ये क्या कर रही हो दीदी। मनु का स्वर सुनकर बाबी एक बार तो सकपका गई लेकिन दूसरे ही पल बोली,
मेरी अच्छी बहन किसी से ये बात कहना मत।
लेकिन दीदी ये तो गंदी बात है।
तुम्हे नहीं मालूम इस खेल में कितना मजा आता है। तुमने कभी किसी के साथ यह खेल खेला है? मनु ने नकारात्मक सिर हिला दिया तो बाबी बोली,
मेरे साथ खेलोगी?
मनु ने हां में सिर हिलाया। तब बाबी ने पहले तो उसके तमाम कपड़े उतार दिए। फिर अपने कपड़े भी उतार दिए।