मधु सारी रात बस इसी सोच में डूबी रही। इधर कमल अपने कमरे में रातभर बॉबी के खयालों में करवटें बदलता रहा। उसे रह-रहकरस बॉबी के साथ बिताए हसीन लमहे याद आ रहे थे। बॉबी की मखमली चूत और गेंद सी चूचिंयों के स्पर्श का अहसास उसे सोने नहीं दे रहा था। वह जानता था कि अब बॉबी के साथ अकेले होना और हसीन पलों का मौका निकालना आसान नहीं होगा। कमल बॉबी की जुदाई और उसकी याद में तड़प रहा था तो मधु कमल का लौड़ा अपनी चूत में लेने की योजनाएं बनाने की सोच में करवटें बदलती रही। रात दोनों की ही जागते बीत गई और मधु के जेहन में एक खयाल घर कर गया कि सुबह उठते ही कमल को अपनी जवानी का जलवा दिखाकर पटा लेगी और उसकी चूत में कमल का लंड होगा।
यह खयाल आते ही मधु का जिस्म रोमांच से भर उठा और वह मन ही मन मुस्कुरा उठी कि अब बच्चू बचकर कहां जाएगा। मधु जानती थी कि दूसरे लड़कों की तरह कमल भी मधु के जिस्म की एक झलक देखते ही दीवाना हो जाएगा और उसके साथ वह सब करने के लिए खुद ही मिन्नतें करने लगेगा, जो वह चाहती थी। यही सोचते-सोचते मधु निद्रा देवी की गोद में चली गई और कमल के साथ बिस्तर पर होने वाले उस खेल के सुखद आनंद वाले सपने में डूब गई। कमल भी बॉबी की याद में कब तक जागता। आधी रात के बाद नींद ने उसे अपने आगोश में ले ही लिया।
सुबह जब कमल उठा तो साढ़े आठ बज रहे थे। चूंकि कॉलेज अगले दिन से खुलने वाले थे, इसलिए उसे घर पर ही रहना था। बॉबी पहले ही कह गई थी कि वह उससे कॉलेज के दिन ही मिलेगी। उसके आने की भी कोई संभावना नहीं थी। उसने आसपास थोड़ा घूमने का सोचा और बिस्तर छोड़कर बाथरूम में घुस गया। कुछ देर बाद वह नहा धोकर निकला और आईने के सामने खड़े होकर बाल संवारने लगा। तभी मधु उसके कमरे में चाय का कप लेकर दाखिल हुई। किसी के आने की आहट सुनकर कमल पलटा तो सामने मधु को चाय का प्याला लिए खड़ा पाया। मधु को देखकर कमल सकपका गया। मधु ने मैक्सी पहनी हुई थी और गले से नीचे दो बटन खुले थे, जिससे उसकी चूंचियों का ऊपरी हिस्सा नुमायां हो रहा था। कमल ने हड़बड़ाते हुए पूछा,
जी, आप। यहां?
क्यों नहीं आ सकती क्या? मधु ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
नहीं जी आ क्यों नहीं सकती। आखिर घर तो आपका ही है। आपने जो किया उसके लिए मैं हमेशा आपका शुक्रगुजार रहुंगा।
अरे-अरे मैं यहां शुक्रिया लेने नहीं बल्कि चाय देने आई हूं। मुझे पता है कि तुम्हारे पास अभी चाय का सामान नहीं होगा। मधु की मुस्कान और गहरी हो गई।
कमल ने खामोशी से उसके हाथ से चाय का प्याला ले लिया और बिस्तर पर बैठकर चुस्कियां लेने लगा। मधु अब भी वहीं खड़ी उसे ही देखे जा रही थी। मधु की नजरों से कमल असहज हुआ जा रहा था। वह सोच रहा था कि अब तक वह खड़ी क्यों है, जा क्यों नहीं रही, मगर वह उसे जाने के लिए कह नहीं सकता था।
कमल सोचों में गुम ही था कि अचानक मधु जोर से चिंहुंकी,
ऊई मां, मर गई?
क्या हुआ, कमल ने हकबकाते हुए पूछा।
कुछ नहीं लगता है किसी चींटी ने काट लिया, मधु सिसकते हुए बोली।
कहां? बस यूं ही कमल के मुंह से निकल गया।
मधु तो मानो इसी का इंतजार कर रही थी, वह कमल के करीब पहुंची और मैक्सी के दो और बटन खोलकर अपनी एक चूंची बाहर निकालकर बोली, कमल को दिखाते हुए बोली,
यहां...यहां काटी है।
मधु की इस हरकत से कमल हड़बड़ा गया। वह सोच भी नहीं सकता था कि मधु यूं ही अचानक उसके सामने अपनी चूंची खोलकर रख देगी। मधु की चूंची गोरी और आगे गुलाबी निपल, जैसा की मधु सोचती थी, वाकई किसी की भी नीयत पलभर में बिगाड़ऩे के लिए काफी थी, मगर कमल ने हड़बड़ाकर मुंह दूसरी तरफ फेर लिया।
मधु बोली, क्या हुआ। देखो न मुझे चींटी ने काटा। कुछ करो न।
आप अपनी चूंची को मैक्सी में डाल लीजिए मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।
क्यों क्या हुआ, मधु घूमकर कमल की तरफ आ गई और मासूमियत से पूछा मैने क्या किया।
आप जो कर रही हैं या जो करना चाह रही हैं, वह ठीक नहीं है।
क्या ठीक नहीं है, मधु अब भी मासूम होने की एक्टिंग कर रही थी। नंगी चूंची अभी उसके हाथ में ही थी।
कमल मधु को इस हालत में देखकर काफी असहज हो गया। वह बोला,
देखिए मधु जी आप बॉबी की सहेली हैं, इस नाते मैं आपकी काफी इज्जत करता हूं, मगर आप इसे अंदर कर लीजिए। मैं वैसा लड़का नहीं हूं। मैं बॉबी के अलावा किसी और के साथ यह सब नहीं कर सकता।
क्यों क्या मैं खूबसूरत नहीं हंूं, मधु को अंदर ही अंदर झुंझलाहट हो रही थी, मगर प्रकट में वह उसी तरह मुस्कुराते हुए बोली।
बहुत खूबसूरत हैं, कोई भी लड़का आप पर मर-मिट सकता है, मगर मैने बॉबी से प्यार किया है और उसी का होकर रहूंगा। कमल ने शांत स्वर में जवाब दिया।
मधु कुछ देर उसका चेहरा देखती रही और फिर बोली, कमल मैं तुम्हें पाना चाहती हूं। बस एक बार तुम मेरे जिस्म को भरपूर प्यार दो, यह कहते-कहते मधु ने अपनी मैक्सी उतार दी।
मधु का गोरा जिस्म सोने की तरह चमक रहा था। उसकी गोरी चूंचियां, तीर की तरह तनी हुई। आमंत्रण सी दे रही थीं। उसकी गोरी चिकनी तिकोनी चूत, जिसे देखकर ही मुंह में पानी आ जाए। पतली कमर और शानदार उभार लिए चूतड़। मधु का जिस्म देखकर ही किसी भी मर्द में करंट दौड़ जाए, मगर कमल ने तुरंत निगाहें फेर लीं। उसने मधु की मैक्सी उठाकर उसके जिस्म पर फेंकते हुए कहा,
आप यहां से चली जाईए। आपको यदि मुझसे यही सब चाहिए तो मैं नहीं दे सकता। आपके घर में अब मेरा रहना भी मुश्किल है, इसलिए मैं अभी यहां से चला जाऊंगा।
मधु कमल के इस बर्ताव पर हैरान थी। उसे अपनी खूबसूरती पर बड़ा ही घमंड था और आज यही गुरूर गांव के इस लड़के के सामने टूटकर बिखर रहा था। उसने सोचा कि यदि कमल चला गया तो वह कभी इसे पा नहीं सकेगी। ऐसे कम से कम एक उम्मीद तो रहेगी। उसने तुरंत पैंतरा बदला और मैक्सी पहनते हुए हंसकर बोली,
अरे बाप रे इतना गुस्सा। मगर मैं तुम्हारे इस व्यवहार पर खुश हुई।
अब हैरान होने की बारी कमल की थी, वह बोला, जी क्या?
क्या नहीं बुद्धु, मैं तुम्हारा इम्तिहान ले रही थी और खुश हूं कि तुम इसमें पास हो गए।
जी...कमल केवल इतना ही कह पाया।
मधु गंभीरता ओढ़ते हुए बोली, आजकल के लड़के तो हर लड़़की को देखकर ही फिसल जाते हैं, तुमने एक लड़की के नंगे जिस्म को ठुकराकर सिद्ध कर दिया कि तुम बॉबी से सच्चा प्यार करते हो।
पर मधु जी आपको यूं अपने जिस्म की नुमाईश नहीं करना चाहिए।
अरे क्या फर्क पड़ता है, मैं तो वैसे ही बदनाम हूं। मैं नहीं चाहती थी कि मेरी पक्की सहेली को भी कोई ऐसा ही लड़़का मिल जाए। इसलिए ये सब किया। वादा करो बॉबी से इसका जिक्र नहीं करोगे।
जी मैं उससे कुछ नहीं कहूंगा। मगर आप फिर ऐसा कभी मत करना।
अरे पागल, मैं तो तुम्हारी परीक्षा ले रही थी और अब मुझे भरोसा है। फिर ऐसा क्यों करुंगी। यह कहकर वह चलने के लिए पलटी, मगर फिर घूमकर बोली,
और हां तुम कहीं नहीं जा रहे हो, यहीं रहोगे। समझे।
कमल ने केवल हां में सिर हिला दिया। मधु वहां से चली गई। उसके जाने के बाद कमल ने चैन की सांस ली। वह कुछ देर बिस्तर पर बैठा रहा, फिर बाहर निकल गया।
यह खयाल आते ही मधु का जिस्म रोमांच से भर उठा और वह मन ही मन मुस्कुरा उठी कि अब बच्चू बचकर कहां जाएगा। मधु जानती थी कि दूसरे लड़कों की तरह कमल भी मधु के जिस्म की एक झलक देखते ही दीवाना हो जाएगा और उसके साथ वह सब करने के लिए खुद ही मिन्नतें करने लगेगा, जो वह चाहती थी। यही सोचते-सोचते मधु निद्रा देवी की गोद में चली गई और कमल के साथ बिस्तर पर होने वाले उस खेल के सुखद आनंद वाले सपने में डूब गई। कमल भी बॉबी की याद में कब तक जागता। आधी रात के बाद नींद ने उसे अपने आगोश में ले ही लिया।
सुबह जब कमल उठा तो साढ़े आठ बज रहे थे। चूंकि कॉलेज अगले दिन से खुलने वाले थे, इसलिए उसे घर पर ही रहना था। बॉबी पहले ही कह गई थी कि वह उससे कॉलेज के दिन ही मिलेगी। उसके आने की भी कोई संभावना नहीं थी। उसने आसपास थोड़ा घूमने का सोचा और बिस्तर छोड़कर बाथरूम में घुस गया। कुछ देर बाद वह नहा धोकर निकला और आईने के सामने खड़े होकर बाल संवारने लगा। तभी मधु उसके कमरे में चाय का कप लेकर दाखिल हुई। किसी के आने की आहट सुनकर कमल पलटा तो सामने मधु को चाय का प्याला लिए खड़ा पाया। मधु को देखकर कमल सकपका गया। मधु ने मैक्सी पहनी हुई थी और गले से नीचे दो बटन खुले थे, जिससे उसकी चूंचियों का ऊपरी हिस्सा नुमायां हो रहा था। कमल ने हड़बड़ाते हुए पूछा,
जी, आप। यहां?
क्यों नहीं आ सकती क्या? मधु ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
नहीं जी आ क्यों नहीं सकती। आखिर घर तो आपका ही है। आपने जो किया उसके लिए मैं हमेशा आपका शुक्रगुजार रहुंगा।
अरे-अरे मैं यहां शुक्रिया लेने नहीं बल्कि चाय देने आई हूं। मुझे पता है कि तुम्हारे पास अभी चाय का सामान नहीं होगा। मधु की मुस्कान और गहरी हो गई।
कमल ने खामोशी से उसके हाथ से चाय का प्याला ले लिया और बिस्तर पर बैठकर चुस्कियां लेने लगा। मधु अब भी वहीं खड़ी उसे ही देखे जा रही थी। मधु की नजरों से कमल असहज हुआ जा रहा था। वह सोच रहा था कि अब तक वह खड़ी क्यों है, जा क्यों नहीं रही, मगर वह उसे जाने के लिए कह नहीं सकता था।
कमल सोचों में गुम ही था कि अचानक मधु जोर से चिंहुंकी,
ऊई मां, मर गई?
क्या हुआ, कमल ने हकबकाते हुए पूछा।
कुछ नहीं लगता है किसी चींटी ने काट लिया, मधु सिसकते हुए बोली।
कहां? बस यूं ही कमल के मुंह से निकल गया।
मधु तो मानो इसी का इंतजार कर रही थी, वह कमल के करीब पहुंची और मैक्सी के दो और बटन खोलकर अपनी एक चूंची बाहर निकालकर बोली, कमल को दिखाते हुए बोली,
यहां...यहां काटी है।
मधु की इस हरकत से कमल हड़बड़ा गया। वह सोच भी नहीं सकता था कि मधु यूं ही अचानक उसके सामने अपनी चूंची खोलकर रख देगी। मधु की चूंची गोरी और आगे गुलाबी निपल, जैसा की मधु सोचती थी, वाकई किसी की भी नीयत पलभर में बिगाड़ऩे के लिए काफी थी, मगर कमल ने हड़बड़ाकर मुंह दूसरी तरफ फेर लिया।
मधु बोली, क्या हुआ। देखो न मुझे चींटी ने काटा। कुछ करो न।
आप अपनी चूंची को मैक्सी में डाल लीजिए मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।
क्यों क्या हुआ, मधु घूमकर कमल की तरफ आ गई और मासूमियत से पूछा मैने क्या किया।
आप जो कर रही हैं या जो करना चाह रही हैं, वह ठीक नहीं है।
क्या ठीक नहीं है, मधु अब भी मासूम होने की एक्टिंग कर रही थी। नंगी चूंची अभी उसके हाथ में ही थी।
कमल मधु को इस हालत में देखकर काफी असहज हो गया। वह बोला,
देखिए मधु जी आप बॉबी की सहेली हैं, इस नाते मैं आपकी काफी इज्जत करता हूं, मगर आप इसे अंदर कर लीजिए। मैं वैसा लड़का नहीं हूं। मैं बॉबी के अलावा किसी और के साथ यह सब नहीं कर सकता।
क्यों क्या मैं खूबसूरत नहीं हंूं, मधु को अंदर ही अंदर झुंझलाहट हो रही थी, मगर प्रकट में वह उसी तरह मुस्कुराते हुए बोली।
बहुत खूबसूरत हैं, कोई भी लड़का आप पर मर-मिट सकता है, मगर मैने बॉबी से प्यार किया है और उसी का होकर रहूंगा। कमल ने शांत स्वर में जवाब दिया।
मधु कुछ देर उसका चेहरा देखती रही और फिर बोली, कमल मैं तुम्हें पाना चाहती हूं। बस एक बार तुम मेरे जिस्म को भरपूर प्यार दो, यह कहते-कहते मधु ने अपनी मैक्सी उतार दी।
मधु का गोरा जिस्म सोने की तरह चमक रहा था। उसकी गोरी चूंचियां, तीर की तरह तनी हुई। आमंत्रण सी दे रही थीं। उसकी गोरी चिकनी तिकोनी चूत, जिसे देखकर ही मुंह में पानी आ जाए। पतली कमर और शानदार उभार लिए चूतड़। मधु का जिस्म देखकर ही किसी भी मर्द में करंट दौड़ जाए, मगर कमल ने तुरंत निगाहें फेर लीं। उसने मधु की मैक्सी उठाकर उसके जिस्म पर फेंकते हुए कहा,
आप यहां से चली जाईए। आपको यदि मुझसे यही सब चाहिए तो मैं नहीं दे सकता। आपके घर में अब मेरा रहना भी मुश्किल है, इसलिए मैं अभी यहां से चला जाऊंगा।
मधु कमल के इस बर्ताव पर हैरान थी। उसे अपनी खूबसूरती पर बड़ा ही घमंड था और आज यही गुरूर गांव के इस लड़के के सामने टूटकर बिखर रहा था। उसने सोचा कि यदि कमल चला गया तो वह कभी इसे पा नहीं सकेगी। ऐसे कम से कम एक उम्मीद तो रहेगी। उसने तुरंत पैंतरा बदला और मैक्सी पहनते हुए हंसकर बोली,
अरे बाप रे इतना गुस्सा। मगर मैं तुम्हारे इस व्यवहार पर खुश हुई।
अब हैरान होने की बारी कमल की थी, वह बोला, जी क्या?
क्या नहीं बुद्धु, मैं तुम्हारा इम्तिहान ले रही थी और खुश हूं कि तुम इसमें पास हो गए।
जी...कमल केवल इतना ही कह पाया।
मधु गंभीरता ओढ़ते हुए बोली, आजकल के लड़के तो हर लड़़की को देखकर ही फिसल जाते हैं, तुमने एक लड़की के नंगे जिस्म को ठुकराकर सिद्ध कर दिया कि तुम बॉबी से सच्चा प्यार करते हो।
पर मधु जी आपको यूं अपने जिस्म की नुमाईश नहीं करना चाहिए।
अरे क्या फर्क पड़ता है, मैं तो वैसे ही बदनाम हूं। मैं नहीं चाहती थी कि मेरी पक्की सहेली को भी कोई ऐसा ही लड़़का मिल जाए। इसलिए ये सब किया। वादा करो बॉबी से इसका जिक्र नहीं करोगे।
जी मैं उससे कुछ नहीं कहूंगा। मगर आप फिर ऐसा कभी मत करना।
अरे पागल, मैं तो तुम्हारी परीक्षा ले रही थी और अब मुझे भरोसा है। फिर ऐसा क्यों करुंगी। यह कहकर वह चलने के लिए पलटी, मगर फिर घूमकर बोली,
और हां तुम कहीं नहीं जा रहे हो, यहीं रहोगे। समझे।
कमल ने केवल हां में सिर हिला दिया। मधु वहां से चली गई। उसके जाने के बाद कमल ने चैन की सांस ली। वह कुछ देर बिस्तर पर बैठा रहा, फिर बाहर निकल गया।