परदेशी भाग 15

अगले दिन कमल कॉलेज पहुंचा तो पाया बॉबी मेन गेट पर ही उसका इंतजार कर रही थी। बॉबी को देखते ही कमल खिल उठा और मुस्कुरा दिया। बॉबी ने भी मुस्कुरा कर कमल का स्वागत किया। वह इस बात से अनजान थी कि रंजीत और विनोद अपनी मंडली के साथ तब से ही उसके आसपास न सिर्फ मंडरा भी रहे थे बल्कि उस पर फब्तियां भी कस रहे थे, जब से वह वहां आई थी। बॉबी कमल के खयालों में इतनी खोई थी कि उसे उन लोगों का अहसास भी नहीं था। कमल के आते ही बॉबी ने उसका हाथ पकड़ लिया और यह देखकर रंजीत और विनोद दोनों जलभुनकर खाक हो गए। रंजीत ने विनोद से कहा,
देख रहा है, हमें देखकर ये और इसकी मां कैसे उछल रही थी और अब सरेआम एक लड़के का हाथ पकड़कर घूम रही है।
घूमने दे रंजीत। इसको साली को एक दिन सबक जरूर सिखाएंगे। इस मादरचोद की गांड और चूत दोनों में लौड़ा न पेला तो मेरा नाम विनोद नहीं।
तू सही कहता है और यह गांव का छोकरा, इसकी साले की गांड में तो मूसल डालूंगा। मादरचोद को आए देर नहीं हुई और कॉलेज की पटाखा को पटा लिया।
वे इस तरह की बातें करते रह गए और कमल का हाथ पकड़े-पकड़े ही बॉबी कॉलेज में दाखिल हुई और प्रिंसिपल के कमरे तक छोड़ दिया। रास्ते भर वह कमल को कॉलेज की खूबियां गिनाती रही। कमल केवल हां-हूं में जवाब देता रहा। वह तो बॉबी का साथ पाकर ही इतना खुश था कि उसे होश ही कहां था दूसरी ओर देखे। एक तरफ कॉलेज के लड़के कमल के भाग्य से ईष्र्या कर रहे थे और दूसरी ओर लड़कियां कमल का सादगी भरा रूप और उसके आकर्षक व्यक्तित्व पर मर मिटी थीं। वे समझ नहीं पा रही थीं कि गांव से आए इस छोकरे से बॉबी पहले ही दिन इतनी बेतकल्लुफ कैसे हो गई। उन लड़कियों में कुछ बॉबी की स्कूल टाइम की सहेलियां भी थीं, जो बॉबी की तुनकमिजाजी को अच्छे से जानती थीं और यह भी जानती थीं कि बॉबी किसी लड़के को तो मुंह लगा ही नहीं सकती।
ये लड़कियां बॉबी की कमल के साथ बेतकल्लुफी पर हैरत में भी थीं और जल भी रहीं थीं। वे सोच रही थीं कि काश वे बॉबी के स्थान पर होती तो कमल का हाथ पकड़कर प्रिंसिपल के कमरे तक नहीं ले जा रही होती, बल्कि किसी एकांत स्थान पर ले गई होती और वहां बैठकर प्यार की बातें कर रही होती। उन लड़कियों को क्या पता था कि बॉबी और कमल प्यार की उस सीमा को भी पार कर चुके हैं जो वे सोच भी नहीं रही थीं और वह भी पहली ही मुलाकात में।
कमल प्रिंसिपल के सामने बैठा था और बॉबी बेसब्री से बाहर उसका इंतजार कर रही थी। तभी मधु वहां आ पहुंची। उसने आते ही बॉबी को गले लगा लिया और पूछा,
यहां क्या कर रही है? क्लास में नहीं चलना क्या?
कमल सर के कमरे में गया है, उसका ही इंतजार कर रही हूं।
अरे वाह मेरी बन्नो, इतना प्यार। लैला-मजनू को फेल कर दिया तुम दोनों ने तो।
बॉबी केवल मुस्कुरा दी, मगर उसकी मुस्कान में भी एक अलग तरह का गर्व झलक रहा था। अचानक मधु बोली,
बॉबी संभलकर रहना, ये लड़के जो होते हैं न बड़े ही हरामी होते हैं। नई लड़की देखकर इनके मुंह में पानी आ जाता है। उसकी चूंची और चूत से जीभर खेलते हैं और फिर कोई और लड़़की मिलते ही छोड़ देते हैं।
मेरा कमल ऐसा नहीं है, मधु। बॉबी ने गर्दन ऊंची कर घमंड से कहा।
हर लड़का ऐसा ही होता है, बॉबी। मैं अच्छे से इनकी जात जानती हूं। जहां नई चूत देखी नहीं कि जीभ निकालकर दुम हिलाने लगते हैं।
तू कुछ भी कह मधु, मगर मुझे कमल पर पूरा भरोसा है।
और अगर यह भरोसा मैं तोड़ दूं तो? मधु ने पूछा।
कैसे? बॉबी ने उसकी तरफ मुंह घुमाकर कहा।
देख बॉबी तू तो मुझे जानती ही है। मुझे एक लड़के साथ कभी संतुष्टि नहीं मिली। मैं कपड़ों की तरह उन्हें बदलती हूं। तू कहे तो मैं कमल पर लाइन मारती हूं। अगर वह दूसरे लड़कों की तरह हुआ तो जीभ निकालते हुए मेरे पास चला आएगा, नहीं तो मुझे बड़़ी खुशी होगी कि मेरी सहेली को एक सच्चा प्रेमी मिल गया।
तुझे जो करना है कर ले मधु, मुझे भरोसा है कि कमल तेरा नंगा जिस्म देखकर भी नहीं पिघलेगा।
मधु, बॉबी के क्या बताती कि पिछली रात कुछ ऐसा हो चुका है, जब कमल ने उसका नंगा जिस्म ठुकरा दिया था। मगर वह एक चांस और लेना चाहती थी। इस बार बॉबी को इसलिए बता रही थी कि कहीं कमल उसे बता दे तो उसके पास यह बहाना रहेगा कि दोनों उसकी परीक्षा ले रही थीं। प्रकट में वह बोली,
मैं आज से ही उसे भाव देना शुरू कर देती हूं। तू देख लेना दो दिन बाद वह मेरे बिस्तर पर होगा और मेरी चूत चाट रहा होगा।
तू वहम में है मधु। माना तू बहुत खूबसूरत है, मगर वह कमल है। तेरी जैसी हजार लड़कियां भी चुत खोलकर खड़ी हो जाएं तो भी वह मेरा ही रहेगा।
तो लगी शर्त, मधु ने हाथ बढ़ाकर कहा।
लग गई। बॉबी ने उसके हाथ पर हाथ मारकर कहा।
शर्त जीत गई तो क्या मिलेगा। मधु ने पूछा।
जो तू कहेगी। बॉबी ने आत्मविश्वास भरे लहजे में जवाब दिया।
मधु ने सोच लिया कि यदि कमल उसकी खूबसूरती के जाल में फंस जाता है तो वह बॉबी को रंजीत और विनोद के साथ चूत-लंड का खेल खेलने के लिए राजी कर लेगी। दोनों कई बार उसे बॉबी की चूत दिलवाने की गुजारिश कर चुके थे, मगर हर बार वह अपनी भोली सहेली का पक्ष लेती। कमल के आने के बाद उसी भोली सहेली से वह जलने लगी थी और अब वह उससे पता नहीं किस बात का बदला लेना चाहती थी।
तभी कमल प्रिंसिपल के कमरे से बाहर आ गया और दोनों की बातचीत बंद हो गई। मधु ने मुस्कुराकर कमल का अभिवादन किया और पूछा,
जब एक ही कॉलेज आना था तो रुक नहीं सकते थे। दोनों साथ आते।
जी मुझे सुबह जल्दी उठने और निकलने की आदत है। पैदल-पैदल यहां तक चला आया। फिर प्रिंसिपल सर से मिलकर आवेदन भी भरना था।
मधु कुछ कहती इसके पहले बॉबी बोल पड़ी, हो गया दाखिला।
हां हो गया और सर ने कहा मैं आज से ही क्लास में बैठ सकता हूं।
तो चलो। बॉबी ने फिर से उसका हाथ पकड़ते हुए कहा, देर किस बात की है। क्लास शुरू हो चुकी है।
तीनों क्लास की तरफ चल दिए।