मधु के जाते ही कमल ने बॉबी को बांहों में भर लिया। बॉबी कसमसाते हुए बोली,
क्या करे हो। क्यों इतने उतावले हो रहे हो। मधु आ जाएगी तो क्या सोचेगी।
कमल शरारती ढंग से मुस्कुराकर बोला, मधु अब इतनी जल्दी नहीं आने वाली। वह जानती है कि दो प्रेमी कई दिनों बाद मिल रहे हैं। वह हमें मौका देने के लिए ही तो कमरे से बाहर गई है।
यह कहकर कमल ने बॉबी के होंठ चूम लिए और इधर उसका हाथ बॉबी के चूतड़ों तक पहुंच चुका था। बॉबी ने उसकी पकड़ से छूटने की कोशिश करते हुए कहा,
अच्छा बाबा माना कि मधु नहीं आएगी, मगर दरवाजा तो बंद करो लो कम से कम। अगर आ भी गई तो जान जाएगी कि अंदर क्या चल रहा है और चली जाएगी।
कमल ने कहा, हां यह ठीक है। इसके बाद वह मुड़ा और दरवाजा बंद करने लगा। जैसे ही दरवाजा बंद करके घूम तो पाया कि बॉबी पलंग पर लेटी है और उसकी तरफ मुस्कुराते हुए देख रही है।
क्या इरादा है, कमल ने पूछा।
वही, जो तुम्हारा है। अब जल्दी से आओ और मेरी चूंचियों और चूत पर अपना कमाल दिखाओ। मधु को इतनी ज्यादा देर भी नहीं लगने वाली।
इधर मधु कहकर तो गई थी कि चाय लेकर आती है, मगर वह कमरे के बाहर निकलते ही ओट में हो गई थी। उसने अंदर से दोनों की आवाजें सुनी और मन ही मन कुछ सोच लिया। जैसे ही कमल ने दरवाजा बंद किया वह दरवाजे पर पहुंच गई। उसकी आंख दरवाजे की झिरी पर जम गईं।
अंदर कमल ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और बॉबी ने जल्दी-जल्दी अपने कपड़े भी अलग कर दिए। अब बॉबी बिस्तर पर नंगी लेटी थी। कमल गौर से उसकी चूत देख रहा था, मगर दरवाजा बंद होने के कारण कमरे में थोड़ा अंधेरा हो गया था। चूंकि कमल की पीठ दरवाजे की तरफ थी, इसलिए मधु को उसका लंड नजर नहीं आ रहा था। वह बेताब थी कमल का लंड निहारने को। तभी बॉबी की आवाज आई,
क्या कर रहे हो, जल्दी आओ न। मधु के आने के पहले जो करना है जल्दी कर लो।
कमल उसके पास पहुंच गया और बॉबी की चूत पर हाथ फिराने लगा। बॉबी मुस्कुरा रही थी। अचानक कमल उठा और घूमकर स्टडी टेबल के पास पहुंचा। इसी क्षण मधु को उसका लंड नजर आ गया। हलकी रोशनी में भी कमल के लंड का आकार और उसकी मोटाई देखकर मधु के मुंह में पानी आ गया। उसकी चूत में सुरसुरी सी होने लगी और उसका मन हुआ कि अभी कमरे में घुस जाए और कमल का लंड अपने मुंंह में लेकर खा डाले।
इधर कमल ने स्टडी टेबल पर रखा टेबल लैंप बिस्तर की तरफ घुमाया और उसे जला दिया। इसके बाद उसकी रोशनी का दायरा बॉबी की चूत पर फोकस कर दिया। बॉबी बोली,
क्या कर रहे हो?
कुछ नहीं, तुम्हारी चूत को गौर से देखना चाहता हूं। इसके पहले मौका ही नहीं मिला।
कमल के यह कहते ही बॉबी मुस्कुरा दी। कमल बॉबी के पास पहुंचा और उसकी चूत को निहारने लगा। बॉबी की गोरी, चिकनी चूत देखकर कमल का लंड झटके लेने लगा। उसने बॉबी की चूत की दोनों फांके फैलाई तो अंदर गुलाबी रंग चमक उठा। वह चूत को अलग-अलग एंगल से फैला-फैलाकर देखता रहा और इधर बॉबी उसकी उंगलियों की हरकतों से ही सिसकारियां भरने लगी थी। अचानक वह बोली,
अब बस करो। जल्दी से चाटना शुरू करो न।
कमल ने भी मुंह बॉबी की चूत पर रख दिया और उसकी दरार को खोलकर गुलाबी हिस्से को जीभ से चाटने लगा। इधर बॉबी सिसियाने लगी और उधर दरवाजे के बाहर खड़ी मधु दिलचस्प नजरों से कमल का यह कमाल देख रही थी। उसे अब तक यह सुख ही नहीं मिला था। जितने भी लड़कों से उसने चूत मरवाई थी, किसी ने भी उसकी चूत को इतने प्यार से चूमा-चाटा नहीं था। मधु की चूत में अब जोरदार खुजली हो रही थी।
इधर कमल बॉबी की चूत को चाटते-चाटते अपनी जीभ उसकी चूत के छेद में घुसेडऩे लगा और बॉबी के मुंह से सी...सी... की जोरदार आवाज निकल रही थी, जो बाहर खड़ी मधु के कानों में भी पड़ रही थी। उसकी चूत को चाटते-चाटते ही कमल घूम गया और बॉबी ने उसका लंड पकड़कर अपने मुंह में डाल लिया। यह दृश्य देखकर मधु का हाथ अपने आप ही अपनी चड्ढी में पहुंच गया और उसे बॉबी से जलन होने लगी, जो इस समय कमल का लंड जोर-जोर से चूस रही थी। कुछ देर तक दोनों एक दूसरे के यौनांग मुंह से चाटते-चूसते रहे। इसके बाद कमल हटा और अपना लंड बॉबी की चूत के छेद पर टिकाकर उस पर लेट गया। बॉबी तो मानो इसी पल की प्रतीक्षा कर रही थी। कमल के लंड का स्पर्श ही अपनी चूत के छेद पर पाते ही उसने अपनी आंखें मूंद ली। कमल ने उसकी चूंची को मुंह में लिया और कमर को एक धक्का लगाया। बॉबी की चिकनी चूत में उसका लंड फिसलता चला गया। अंदर बॉबी के मुंह से जोरदार सिसकारी निकली और बाहर मधु के मुंह से।
कमल बॉबी की चूंचियों को चूसते हुए उसकी चूत में लंड को अंदर-बाहर कर रहा था। कमल का लंड हर धक्के के साथ बॉबी की चूत में जाता और बाहर आता। कमरे में चुदाई की आवाज गूंज रही थी और गूंज रही थी बॉबी के मुंह से निकलने वाली आनंदकारी सिसकारियों की आवाजें। बॉबी ने अपनी दोनों टांगों को कमल की कमर पर कस लिया और खुद भी नीचे से कमर उचका-उचकाकर धक्के का जवाब देने लगी। दोनों पसीने से लथपथ हो रहे थे, अचानक कमल के मुंह से तेज सिसकारी की आवाज निकली और उसने अपना पूरा लंड बॉबी की चूत में जड़ तक ठेल दिया। उसके लंड से वीर्य छूटकर बॉबी की चूत की दीवारों से टकरा रहा था और इधर बॉबी का शरीर भी ऐंठने लगा और उसने कसकर कमल के लंड को अपनी चूत में जोर से भींच लिया।
बाहर मधु की हालत खराब हो चुकी थी। वह दरवाजे के सामने से हटी और कुछ ही देर में चाय लेकर आ गई। तब तक बॉबी और कमल भी कपड़े पहन चुके थे। मधु ने जैसे ही दरवाजा खटखटया, बॉबी ने तुरंत खोल दिया। मधु ने उसकी तरफ आंख मारते हुए फुसफुसाकर पूछा,
क्या हो रहा था, मेरी जान?
कुछ नहीं, बॉबी ने शरमाते हुए जवाब दिया। बस इधर-उधर की बातें चल रही थीं।
मैं जानती हूं कि दरवाजा बंद करके कौन सी इधर-उधर की बातें की जाती हैं। मधु फिर फुसफुसाई।
बॉबी ने शरम से नजरें झुका ली। कमल बिस्तर पर बैठा दोनों सहेलियों को टुकुर-टुकुर देख रहा था। उसे उनकी बातों की आवाज तो नहीं आ रही थी, मगर वह समझ गया कि क्या बातें हो रही थीं। मधु ने चाय का प्याला उसकी तरफ बढ़ाया तो उसके होंठों पर शरारती और भेदभरी मुस्कुराहट थी। कमल ने उससे नजरें चुराते हुए चाय का प्याला थाम लिया। तीनों ने चुपचाप चाय पी और फिर बॉबी बोली,
मधु मैं चलती हूं। इसका ध्यान रखना। फिर कमल की तरफ मुड़कर बोली, अब यहां नहीं आउंगी। दो दिन बाद कॉलेज में ही मिलते हैं।
ठीक है, कमल ने कहा।
और बॉबी चली गई। कुछ देर बाद मधु भी खाली कप लेकर चली गई और कमल अकेला रह गया कमरे में। वह अपना सामान निकाल कर करीने से जमाने लगा। मधु अपने कमरे में लेटी योजना बना रही थी कि कैसे कमल का लंड अपनी चूत में उतार सके।
क्या करे हो। क्यों इतने उतावले हो रहे हो। मधु आ जाएगी तो क्या सोचेगी।
कमल शरारती ढंग से मुस्कुराकर बोला, मधु अब इतनी जल्दी नहीं आने वाली। वह जानती है कि दो प्रेमी कई दिनों बाद मिल रहे हैं। वह हमें मौका देने के लिए ही तो कमरे से बाहर गई है।
यह कहकर कमल ने बॉबी के होंठ चूम लिए और इधर उसका हाथ बॉबी के चूतड़ों तक पहुंच चुका था। बॉबी ने उसकी पकड़ से छूटने की कोशिश करते हुए कहा,
अच्छा बाबा माना कि मधु नहीं आएगी, मगर दरवाजा तो बंद करो लो कम से कम। अगर आ भी गई तो जान जाएगी कि अंदर क्या चल रहा है और चली जाएगी।
कमल ने कहा, हां यह ठीक है। इसके बाद वह मुड़ा और दरवाजा बंद करने लगा। जैसे ही दरवाजा बंद करके घूम तो पाया कि बॉबी पलंग पर लेटी है और उसकी तरफ मुस्कुराते हुए देख रही है।
क्या इरादा है, कमल ने पूछा।
वही, जो तुम्हारा है। अब जल्दी से आओ और मेरी चूंचियों और चूत पर अपना कमाल दिखाओ। मधु को इतनी ज्यादा देर भी नहीं लगने वाली।
इधर मधु कहकर तो गई थी कि चाय लेकर आती है, मगर वह कमरे के बाहर निकलते ही ओट में हो गई थी। उसने अंदर से दोनों की आवाजें सुनी और मन ही मन कुछ सोच लिया। जैसे ही कमल ने दरवाजा बंद किया वह दरवाजे पर पहुंच गई। उसकी आंख दरवाजे की झिरी पर जम गईं।
अंदर कमल ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और बॉबी ने जल्दी-जल्दी अपने कपड़े भी अलग कर दिए। अब बॉबी बिस्तर पर नंगी लेटी थी। कमल गौर से उसकी चूत देख रहा था, मगर दरवाजा बंद होने के कारण कमरे में थोड़ा अंधेरा हो गया था। चूंकि कमल की पीठ दरवाजे की तरफ थी, इसलिए मधु को उसका लंड नजर नहीं आ रहा था। वह बेताब थी कमल का लंड निहारने को। तभी बॉबी की आवाज आई,
क्या कर रहे हो, जल्दी आओ न। मधु के आने के पहले जो करना है जल्दी कर लो।
कमल उसके पास पहुंच गया और बॉबी की चूत पर हाथ फिराने लगा। बॉबी मुस्कुरा रही थी। अचानक कमल उठा और घूमकर स्टडी टेबल के पास पहुंचा। इसी क्षण मधु को उसका लंड नजर आ गया। हलकी रोशनी में भी कमल के लंड का आकार और उसकी मोटाई देखकर मधु के मुंह में पानी आ गया। उसकी चूत में सुरसुरी सी होने लगी और उसका मन हुआ कि अभी कमरे में घुस जाए और कमल का लंड अपने मुंंह में लेकर खा डाले।
इधर कमल ने स्टडी टेबल पर रखा टेबल लैंप बिस्तर की तरफ घुमाया और उसे जला दिया। इसके बाद उसकी रोशनी का दायरा बॉबी की चूत पर फोकस कर दिया। बॉबी बोली,
क्या कर रहे हो?
कुछ नहीं, तुम्हारी चूत को गौर से देखना चाहता हूं। इसके पहले मौका ही नहीं मिला।
कमल के यह कहते ही बॉबी मुस्कुरा दी। कमल बॉबी के पास पहुंचा और उसकी चूत को निहारने लगा। बॉबी की गोरी, चिकनी चूत देखकर कमल का लंड झटके लेने लगा। उसने बॉबी की चूत की दोनों फांके फैलाई तो अंदर गुलाबी रंग चमक उठा। वह चूत को अलग-अलग एंगल से फैला-फैलाकर देखता रहा और इधर बॉबी उसकी उंगलियों की हरकतों से ही सिसकारियां भरने लगी थी। अचानक वह बोली,
अब बस करो। जल्दी से चाटना शुरू करो न।
कमल ने भी मुंह बॉबी की चूत पर रख दिया और उसकी दरार को खोलकर गुलाबी हिस्से को जीभ से चाटने लगा। इधर बॉबी सिसियाने लगी और उधर दरवाजे के बाहर खड़ी मधु दिलचस्प नजरों से कमल का यह कमाल देख रही थी। उसे अब तक यह सुख ही नहीं मिला था। जितने भी लड़कों से उसने चूत मरवाई थी, किसी ने भी उसकी चूत को इतने प्यार से चूमा-चाटा नहीं था। मधु की चूत में अब जोरदार खुजली हो रही थी।
इधर कमल बॉबी की चूत को चाटते-चाटते अपनी जीभ उसकी चूत के छेद में घुसेडऩे लगा और बॉबी के मुंह से सी...सी... की जोरदार आवाज निकल रही थी, जो बाहर खड़ी मधु के कानों में भी पड़ रही थी। उसकी चूत को चाटते-चाटते ही कमल घूम गया और बॉबी ने उसका लंड पकड़कर अपने मुंह में डाल लिया। यह दृश्य देखकर मधु का हाथ अपने आप ही अपनी चड्ढी में पहुंच गया और उसे बॉबी से जलन होने लगी, जो इस समय कमल का लंड जोर-जोर से चूस रही थी। कुछ देर तक दोनों एक दूसरे के यौनांग मुंह से चाटते-चूसते रहे। इसके बाद कमल हटा और अपना लंड बॉबी की चूत के छेद पर टिकाकर उस पर लेट गया। बॉबी तो मानो इसी पल की प्रतीक्षा कर रही थी। कमल के लंड का स्पर्श ही अपनी चूत के छेद पर पाते ही उसने अपनी आंखें मूंद ली। कमल ने उसकी चूंची को मुंह में लिया और कमर को एक धक्का लगाया। बॉबी की चिकनी चूत में उसका लंड फिसलता चला गया। अंदर बॉबी के मुंह से जोरदार सिसकारी निकली और बाहर मधु के मुंह से।
कमल बॉबी की चूंचियों को चूसते हुए उसकी चूत में लंड को अंदर-बाहर कर रहा था। कमल का लंड हर धक्के के साथ बॉबी की चूत में जाता और बाहर आता। कमरे में चुदाई की आवाज गूंज रही थी और गूंज रही थी बॉबी के मुंह से निकलने वाली आनंदकारी सिसकारियों की आवाजें। बॉबी ने अपनी दोनों टांगों को कमल की कमर पर कस लिया और खुद भी नीचे से कमर उचका-उचकाकर धक्के का जवाब देने लगी। दोनों पसीने से लथपथ हो रहे थे, अचानक कमल के मुंह से तेज सिसकारी की आवाज निकली और उसने अपना पूरा लंड बॉबी की चूत में जड़ तक ठेल दिया। उसके लंड से वीर्य छूटकर बॉबी की चूत की दीवारों से टकरा रहा था और इधर बॉबी का शरीर भी ऐंठने लगा और उसने कसकर कमल के लंड को अपनी चूत में जोर से भींच लिया।
बाहर मधु की हालत खराब हो चुकी थी। वह दरवाजे के सामने से हटी और कुछ ही देर में चाय लेकर आ गई। तब तक बॉबी और कमल भी कपड़े पहन चुके थे। मधु ने जैसे ही दरवाजा खटखटया, बॉबी ने तुरंत खोल दिया। मधु ने उसकी तरफ आंख मारते हुए फुसफुसाकर पूछा,
क्या हो रहा था, मेरी जान?
कुछ नहीं, बॉबी ने शरमाते हुए जवाब दिया। बस इधर-उधर की बातें चल रही थीं।
मैं जानती हूं कि दरवाजा बंद करके कौन सी इधर-उधर की बातें की जाती हैं। मधु फिर फुसफुसाई।
बॉबी ने शरम से नजरें झुका ली। कमल बिस्तर पर बैठा दोनों सहेलियों को टुकुर-टुकुर देख रहा था। उसे उनकी बातों की आवाज तो नहीं आ रही थी, मगर वह समझ गया कि क्या बातें हो रही थीं। मधु ने चाय का प्याला उसकी तरफ बढ़ाया तो उसके होंठों पर शरारती और भेदभरी मुस्कुराहट थी। कमल ने उससे नजरें चुराते हुए चाय का प्याला थाम लिया। तीनों ने चुपचाप चाय पी और फिर बॉबी बोली,
मधु मैं चलती हूं। इसका ध्यान रखना। फिर कमल की तरफ मुड़कर बोली, अब यहां नहीं आउंगी। दो दिन बाद कॉलेज में ही मिलते हैं।
ठीक है, कमल ने कहा।
और बॉबी चली गई। कुछ देर बाद मधु भी खाली कप लेकर चली गई और कमल अकेला रह गया कमरे में। वह अपना सामान निकाल कर करीने से जमाने लगा। मधु अपने कमरे में लेटी योजना बना रही थी कि कैसे कमल का लंड अपनी चूत में उतार सके।