परदेशी भाग 12

मधु, बॉबी की पुरानी सहेली थी। दोनों स्कूल के समय से साथ थे, हांलाकि उसकी उम्र बॉबी से एक साल 'यादा थी, मगर दोनों साथ ही रहती थीं। बॉबी जितनी शर्मीली और अंतर्मुखी थी, मधु उतनी ही तेज-तर्रार। स्कूल के समय से ही उसकी दोस्ती कई लड़कों के साथ थी और आज भी नित नए लड़कों से दोस्ती करना उसका शौक है। मधु को जानने वाले तो यहां तक कहते हैं कि वह पुराने लंड को ज्यादा दिनों तक नहीं झेल पाती। उसकी चूत को हर दिन नया लंड चाहिए। जब तक इसे कोई नया लंड न मिल जाए, इसकी चूत की प्यास ही ठंडी नहीं होती। बॉबी, लड़कों के मामले में मधु की इस बेबाकी को जानती तो थी, मगर कोई मतलब नहीं रखती थी और मधु भी उसे अपनी रास लीला से दूर ही रखती थी। इसीलिए दोनों आज भी अच्छी सहेलियां थी। इस वक्त बॉबी, मधु के ही घर पर थी। उसके कमरे में बैठी थी और दोनों सहेलियों में छुट्टियों की बातें हो रही थीं।
हां तो मेरी जान क्या कह रही थी तू, गांव में तुझे कोई लड़का मिला। मधु ने बॉबी को छेड़ते हुए कहा।
कुछ देर पहले ही बॉबी ने मधू को कमल से मिलने और दोस्ती होने की बात बताई थी। तब से ही मधू उसे छेड़ रही थी कि मामला केवल दोस्ती तक ही है या बिस्तर तक भी पहुंचा।
मधु ने जब फिर से यही बात दोहराई तो बॉबी दिखावटी गुस्सा करते हुए बोली, देख अगर तू बार-बार यही सब पूछेगी तो मैं चली जाऊंगी।
अ'छा मत बता, तेरी मर्जी। मगर मैं मान ही नहीं सकती कि किसी लड़के, लड़की में दोस्ती हुई हो और बाद में चूत-लंड तक बात न पहुंची हो। तू तो गांव में काफी दिन रही।
मधू, तू भी न कैसी गंदी बातें करती है।
अरे चल अब बता भी दे। अपनी अच्छी सहेली से कैसा शरमाना।
मधू ने बार-बार जोर दिया तो बॉबी ने शरमाते-शरमाते बता ही दिया कि कैसे खेल-खेल में उनके बीच चूत-लंड का खेल भी शुरू हो गया और वह दो बार चूत भी मरवा चुकी है।
अरे वाह, तू बड़ी ही छुपी रुस्तम निकली। यहां कितने लड़के तेरे पीछे पड़े रहते हैं, तू किसी को घास तक नहीं डालती और चूत खोली भी तो गांव के लड़के के सामने।
बस मधु पता नहीं कैसे ये सब हो गया और अब मुझे लगता है कि शायद यही मेरी तकदीर में था। मैं अब कमल से प्यार करने लगी हूं और वह भी मुझे टूटकर चाहता है।
बॉबी के मुंह से कमल की तारीफ और दोनों के बीच खेल का वर्णन सुन मधु की चूत में खुजली होने लगी, मानो उसकी चूत कमल का लंड मांग रही हो। कमल की गोरे-चिट्टे लंड के वर्णन ने मधु को और भी उत्तेजित कर दिया था। उसने मन ही मन ठान लिया कि कैसे भी हो कमल का लंड अपनी चूत में लेकर रहेगी, ऊपर से अपनी भावनाएं दबाते हुए पूछा,
अच्छा यह तो बता कब आ रहा है तेरा परदेशी।
अरे हां यह तो बताना ही भूल गई। वह दो-तीन दिन में कभी भी आ सकता है। उसने हमारे ही कॉलेज में दाखिला लिया है। उसके रहने का इंतजाम तुझे ही करना है। मैने तेरे घर का ही पता दिया है।
अरे बाप रे, यह क्या किया तूने। मेरे घर पर कहां रहेगा?
माना मेरे मां-बाप गांव गए हैं, मगर पास-पड़ोस वालों ने बता दिया तो मेरी खैर नहीं।
देख मैं कुछ नहीं जानती यह तुझे ही करना है। चाहे तो आज से ही उसके लिए कोई कमरा देखना शुरू कर दे।
कमरा तो खैर मेरे ही घर में एक खाली है, जो किराए पर भी देना है। मगर पता नहीं, मां-बाप तैयार होंगे या नहीं।
सब तैयार हो जाएंगे, तू मना लेना। वैसे भी कमल काफी शरीफ लड़का है।
वह तो देख ही रही हूं कि जनाब कितने शरीफ हैं कि खेल-खेल में एक लड़की की चूत ले ली।
तू भी न बस। अरे वह तो बस हो गया। ऐसा कोई इरादा नहीं था हमारा। बॉबी ने शरमाते हुए कहा।
चल ठीक है, तू कहती है तो मैं ये कमरा उसे दे दूंगी। मधू थके से स्वर में बोली, मगर उसका मन बल्लियों उछल रहा था। उसे लगने लगा कि भाग्य भी उसका साथ दे रहा है और अब कमल का लंड आसानी से उसकी चूत में चला जाएगा।
अभी दोनों बातें ही कर रही थीं कि दरवाजे पर दस्तक हुई।
मधू ने उठकर दरवाजा खोला तो लोहे की छोटी से पेटी लिए एक लड़के को खड़ा पाया।
मधू उसकी तरफ सवालिया निशान से देख ही रही थी कि तभी अंदर बैठी बॉबी की नजर भी उस पर पड़ गई और वह उछलते हुए बोली,
अरे कमल तुम। आज कैसे आ गए। तुम तो दो दिन बाद आने वाले थे न।
बस वो खेतों का सारा काम हो गया था, तो मैने सोचा कि निकल चलता हूं। रहने और खाने का भी इंतजाम करना है। इन दो दिनों में वह कर लूंगा।
उसकी चिंता तुम मत करो। तुम्हारे रहने का इंतजाम मैने कर दिया है। बॉबी चहककर बोली।
कैसे? कमल ने पूछा।
ये मेरी सहेली है, बॉबी ने मधू की तरफ इशारा करते हुए कहा। यह इसी का घर है और यहां एक कमरा खाली भी है जो तुम्हें किराए पर मिल जाएगा।
मधू अब तक कमल को ही निहार रही थी और उसकी चूत की खुजली बढऩे लगी थी। वह खयालों में खो गई कि जब कमल यहां रहेगा तो वो कैसे जवानी का जलवा दिखाकर उसे पटाएगी और अपनी चूत मारने के लिए राजी करेगी।
तभी बॉबी ने उसे कोहनी मारते हुए, ऐ कहां खो गई।
आं..कहीं नहीं बस तेरी किस्तम पर जल रही हूं।
जलती है तो जलती रह, मगर खबरदार इस पर लाइन मारने की कोशिश मत करना। बॉबी ने मुस्कुराते हुए कहा।
कमल यह सुनकर शरमा सा गया और नजरें चुराने लगा, तभी मधू चहककर बोली।
अरे मेरी बन्नो, मैं क्यों इन पर लाइन मारूंगी, मुझे क्या कमी है लड़कों की। तू अपने परदेशी को अपने पास ही रख।
यह कहकर वो अपनेपन से कमल का हाथ पकड़कर घर के भीतर खींच लाई। कमल दोनों सहेलियों की बात सुनकर बेचारगी से बॉबी का चेहरा देख रहा था। बॉबी उसकी हालत पर मुस्कुरा रही थी। अंदर कुर्सी पर बैठाकर मधू बोली, तुम दोनों बातें करों, मैं चाय लेकर आती हूं। यह कहकर वह कमरे से निकलकर चली गई।